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क्रोध और सोच का परिणाम ,

सांप के क्रोध का परिणाम-

बंद दुकान में कहीं से घूमता फिरता एक सांप घुस गया। दुकान में रखी एक आरी से टकराकर सांप मामूली सा जख्मी हो गया। घबराहट में सांप ने पलट कर आरी पर पूरी ताक़त से डंक मार दिया जिस कारण उसके मुंह से खून बहना शुरू हो गया।

अब की बार सांप ने अपने व्यवहार के अनुसार आरी से लिपट कर उसे जकड़ कर और दम घोंट कर मारने की पूरी कोशिश कर डाली। अब सांप अपने गुस्से की वजह से बुरी तरह घायल हो गया।

दूसरे दिन जब दुकानदार ने दुकान खोली तो सांप को आरी से लिपटा मरा हुआ पाया जो किसी और कारण से नहीं केवल अपनी तैश और गुस्से की भेंट चढ़ गया था।

कभी कभी गुस्से में हम दूसरों को हानि पहुंचाने की कोशिश करते हैं मगर समय बीतने के बाद हमें पता चलता है कि हमने अपने आप का ज्यादा नुकसान किया है।

*अब इस कहानी का सार ये है कि अच्छी जिंदगी के लिए कभी कभी हमें, कुछ चीजों को, कुछ लोगों को, कुछ घटनाओं को, कुछ कामों को और कुछ बातों को इग्नोर करना चाहिए। अपने आपको मानसिक मजबूती के साथ इग्नोर करने का आदी बनाइये। जरूरी नहीं कि हम हर एक्शन का एक रिएक्शन दिखाएं। हमारे कुछ रिएक्शन हमें केवल नुकसान ही नहीं पहुंचाएंगे बल्कि हो सकता है कि हमारी जान ही ले लें। सबसे बड़ी शक्ति सहन शक्ति है।





#गरीब_भाई…..
                       #एकछोटीसी_कहानी…..

कहा मर गयी यें लड़की, सुबह से ना जाने कहा गायब हैं,
मुनिया ओ मुनिया,
इसकी माँ तो मर गयी, बाप मेरे पल्लें बाँध गया, अब कहा ढूंढू इसें, मुनिया की सौतेली “माँ” ………

        थोड़ी देर बाद, कहा मर गयी थी छोरी, माँ आज रक्षाबंधन हैं, तो तु क्या कर रही थी, ना तो तेरी माँ है ना भाई और बाप का भी ु नही कहा पीकर पड़ा होगा, जा बर्तन साफ कर, माँ मुजे लगता हैं आज मेरा भाई मुजे जरूर मिलेगा, सौतेली माँ देख छोरी काम कर वरना, खूब पीटेगी, मुनिया थोड़ी देर बाहर रहने दो ना माँ,
तुजे समझ नही आता लड़की भाई ढूंढ रही हैं कहा आसमान से आयेगा, मुनिया माँ थोड़े पैसें दो ना मिठाई और राखी खरीदनी हैं ………….

            सौतेली माँ मुनिया को मारने लगती हैं, करमजली, एक तो छाती पर मूंग तल रही हैं और पैसे भी चाहिए जा अपने बाप से माँग, और मेरे बाहर से आये तक घर का सारा काम हो जाना चाहिए, वरना चमड़ी उदेड़ दूंगी, मुनिया रोते, रोते काम करने लगती हैं, और जल्दी से काम कर के घर के बाहर बैठा जाती हैं, और सबको देखती हैं, कैसे सबके भाई, अपनी_अपनी बहनों से राखी बाँधवातें हैं, और उदास मन से वही बाहर बैठे रहती हैं ………….

          शाम होने को आती हैं मुनिया अभी तक उदाह चेहरा लिए घर के बाहर बैठे रहती हैं,
पास से एक गरीब कचरा बिनने वाला, जिसके तन पर ठीक से कपड़े भी नही थें छोटा सा लड़का उसके पास आता हैं, और कहता हैं दीदी क्या आप मुजे राखी बाँधेगी, मुनिया उसे देखती हैं और खुश हो जाती हैं, और कहती हैं हाँ भाई बिल्कुल मेरा भी कोई भाई नही हैं, मुनिया की सौतेली माँ भी बाहर आ जाती हैं और कहती हैं, देख लो जैसा भाई वैसी बहन दोनो के दोनो भिखारी अच्छी जोड़ी है और हंसने लगती हैं,
पर मुनिया के मन में तो अजीब खुशी थी, वो घर के अंदर दौड़ने लगती हैं फिर रूक कर हल्के से रोने लगती हैं, उसे याद आ जाता हैं ना उसके पास मिठाई हैं ना तो राखी फिर वो उसे बाँधे क्या? ………….

         वो गरीब बच्चा कहता हैं दीदी, आप कोई सा कपड़ा फाड़ लाए, उसी को बाँध दे, मुनिया घर के अंदर जाती हैं और एक कपड़ा और थोड़ी सी शक्कर ले आती हैं, कपड़े की राखी बाँधती हैं और शक्कर खिला देती हैं …………

        गरीब बच्चा अपने बोरे से एक गिफ्ट निकालता हैं, और कहता हैं दीदी इसे खोलिए, मुनिया कहती हैं क्या हैं इसमें? गरीब बच्चा कहता हैं, दीदी इसमें जूतें हैं आप खाली पैर स्कूल जाती हैं मैं रोज देखता हूं, आपको याद हैं मैं वही लड़का हूं, जो महीने भर पहले रास्तें में बेहोश हो गया था, आपने मुजे पानी पिलाया था,
मुनिया की ऑखें नम थी, और पास खड़ी सौतेली माँ भी घूर रही थी …………

       फिर मुनिया ने कहा, देखा माँ मैंने कहा था ना मेरा भाई आयेगा, आप एक साल से मुजे स्कूल के जूतें के लिए रोज मारती थी, आज मेरा भाई मेरे लिए नयें जूतें ले आया, माँ फुसफुसाते हुयें, मारो तुम दोनो भिखारी और अंदर चली जाती हैं …………

          फिर वो गरीब बच्चा कहता हैं अच्छा दीदी मैं चलता हूं, मुनिया उसे गले लगा लेती हैं और वो गरीब बच्चा आगे बढ़ जाता हैं, और मुनिया खुश होकर जूते पहनकर नाचने लगती हैं की मेरा भी भाई है इस दुनिया में
मैं अकेली नही हूं ………….

“सबसे खुबसूरत रिश्ता हैं भाई_बहन का सच कहता हूं दोस्तो खून का हो या ना हो, दिल का होना बहुत जरूरी हैं, और एक बात हमेशा याद रखना भले आप अपनी बहन की चोटी खींच लेना, पर उसकी मुसीबत में हाथ मत खींचना
“और एक बात हंसी की, मैं जितना तंग अपनी बहन को करता हूं, शायद कोई नही करता होगा

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