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कामयाब होना है ..लेकिन कैसे।

कामयाब होना है …………..

कई बार हम अपनी  ज़िंदगी  में नासमझी और बचपने के कारन ,कई बड़ी चीजों को 
समझ ही नहीं पाते , 
और जब समझते तबतक काफी टाइम हो चुका होता है …..

कामयाब होना है…लेकिन कैसे 

कामयाब होना है
  • toching stroy 
  • एक केकड़े की कहानी 
 एकबार एक केकड़ा समंदर की और आगे बढ़ा चला रहा था , वो आगे चलते हुए 
पीछे अपने सुंदर पैरो के निशानों को देख रहा था ,
और उन्हें देखकर वो बहुत खुश होता ,और आगे बढ़ा चला जा रहा था फिर से 
अपने पैरो के निशान देखता और फिर से खुश होता ,

छोटी छोटी सुंदर पैरो की आकृतियाँ और वो उन्हे देख के खूब खुश होता 
और आगे बढ़ा चला जा रहा था ,

इतने में एक बड़ी लहर आई और उसके सरे पैरो के निशान मिटा दिए 
उसे ये देखकर बहुत गुस्सा आया ,उसने कहा ऐ लहर ,मैं तुझे अपना दोस्त मानता था ,
लकिन ये क्या तूने तो मेरे सारे सूंदर पैरो के निशान मीटा दिए ,
तू मेरी दोस्त नहीं है और वो गुस्सा करने लगा , 
लहर मुस्कुराई और उसकी और देखकर कहा पीछे देखो , 
बहुत सारे ,मछुहारे ककड़ो के पैरो के निशान देखते हुए उन्हें पकड़ रहे है 
लहर ने कहा मेने तुम्हारे सारे पैरो के निशाँ मिटा दिए ,
ताकि वो तुम्हे पकड़ ना सके , ककड़े ने ये बात सुनी और खूब रोया ,बहुत रोया 
और इस बात को समझा ,आपकी ज़िंदगी में भी आपके माता पिता ,आपके दोस्त 
आपके शुभचिंतक है जो कभी ना कभी ,कंही ना कंही बहुत प्रकार की चीजे करते है 
आपके लिए ,
लकिन उस वक्त वो आपको गलत लगते है आपको लगता है उन्होंने आपके साथ गलत किया 
आप सोचकर देखिये वो गलत नहीं है ,
वो आपकी भलाई के लिए कुछ ऐसा कर रहे है जो आप अभी इस वक्त समझ नहीं प् रहे है 
लेकिन जिस दिन समझ जाओगे उस दिन वो आपको बहुत अच्छे लगेंगे ,
सायद ये बात आपको बहुत अच्छे से समझ में आई होगी ,
आपकी ज़िंदगी में कोन ऐसा शुभचिंतक है जो आपकी हमेशा भलाई चाहता है ,
थोड़ा दिमाग पर जोर डालकर जरूर सोचे ,


           मौका (कहानी )

एकबार कोई लड़का ,अपनी ज़िंदगी से पेरशान एक महाँन गुरूजी के पास जाता है 
और वो गुरु जी को बोलता है गुरु जी में बहुत ज्यादा पेरशान हु ,
मुझे पैसो की जरूरत है ,में चाहत हु की मेरे माता पिता बहुत खुश रहे ,
और पूरी दुनिया गुमे , लेकिन ये सबकुछ में बोल रेहा हु वो पैसो के बिना संभव नहीं है 
इसके लिए मेरे पास बहुत सारे पैसे होने चाहिए ,
गुरूजी ने उस लडके से  कहा मेरे साथ चलो ,और गुरु जी उसे ऐसी जगहे ले गए जंहा 
बहुत सारे कंकर पड़े थे ,
और लड़के से कहा  ये जो कंकड है इनमे हर एक कंकड़ किसी धातु को सोने में बदल सकती है 
वो कंकड़ जिसपर रखोगे वो सोने का हो  जायेगा ,और उस कंकड़ की पहचान होगी उसके तापमान से 
ये सब कंकड़ छूकर महसूस करोगे तो ठंडे  लगेंगे ,लेकिन सोने में बदल देने वाली कंकड गर्म 
महसूस होगा फिर तुम अपनी ज़िंदगी में चाहो उतने पैसे कमाँ सकते हो ,अगर तुम्हे वो कंकड़ 
मिल गयी ,वो लड़का बहुत ज्यादा खुश हुआ, उसने देखा की ये तो कुछ ही महीनो की बात है 
मुझे रोज के कुछ ही घंटे इसमें देने है ,
लेकिन वो लड़का नहीं जानता था ये टास्क जिस गुरूजी ने दिया है वो सोच समझ कर दिया है 
अगर इतना आसान होता तो बात ही क्या थी ,
लड़का लग गया इस काम में वो जीतने भी कंकड़ थे उन्हें छूटा और जो कंकड़ ठंडा महसूस होता 
उसे वो समंदर में फेंक देता ताकि कंकड़ को समंदर में ना फेंके तो वो कंकड फिर से उसी में मिल 
जाएगी ,एक दिन निकला 5 /6  घंटे दिए  उसने ,सब कंकड़ ठन्डे फील हो रही थीं ,
एक दिन निकला /दो दिन निकले /एक सप्ताह /दो सप्ताह / ऐसे करते हुए 4 महीने निकल गए 
लेकिन अबतक उस लड़के को गर्म कंकड़ नहीं मिली ………….
सब कंकड़ ढंडी महसूस हो रही थी ,अब लडके की मुश्किलें बढ़ चुकी ही , लेकिन एक 
चीज है जो भूल रहा था ,उसका विश्वाश जरूर था की वो कंकड़ उसे मिलेगा जरूर ,
लेकिन धीरे धीरे कंकड़ को ध्यान  परखना कम पड़ता जा रहा था ,
अब वो उन कंकड़ को इतनी बारीकी से नहीं परख रहा था जो उसने सुरु के 3 कंकड़ों को परख रहा था 
दूसरी तरफ से ये भी कहे सकते है की अब उसकी ऐसि habbit  सी हो गयी थि कंकड़ों को 
फटफट से परखना ,और उसे समंदर में फेंकने की ,
5 वे महीने के अंत में उसे वो कंकड़ मिल गयी और उसे वो गर्म कंकड़  महसूस हुई
 लेकिन क्यूंकि उसके जल्दी से कंकड़ को समंदर में फेंकने की आदत बन चुकी थी ,
उसने उस गर्म कंकड़ को भी उस समंदर में फेंक दी ,
और फेंकने के 2 /3  सेकंड बाद उसने अपनी अँगुलियों को महसूस किया , उसको बहुत 
पछतावा हुआ ,क्यूंकि उसकी आदत हो गयी थी हर कंकड़ को देख के फेंकने की ,
लेकिन फेंकने बाद ही उसे एहसास होता है मुझे पता होने के बावजूद भी मने उसे फेंक दिया 

तो इस कहानी से हम ऐसा क्या सीख सकते है जिस से हमारी पूरी जिंदगी बदल सकती है 
ऐसा क्या सीख सकते है जिस से हमारी सोच में बदलाव आ सकता है।,

जिस दिन आपने अपने हर दिन को हलके में लेना सुरु कर दिया।,तो दोस्तों आपको  हर दिन हल्के में 
लने की आदत बन जाएगी  ,और जब कोई बड़ा दिन होगा आपको कुछ करना होगा ,
लेकिन दोस्तों आप उसी दिन को हल्के में ले लोगे , उसे गन्दी आदत ली वजह से 
फिर बाद में आपको पछतावा होगा ,जब पता लगेगा  वो दिन तो normal दिन की तरहे नहीं था 
सोचोगे मेरे पास बहुत बड़ा मौका था ,जिसने मने हल्के में गवा दिया ,क्यूंकि में रोज हर दिन को 
हल्के में लता था ,आपकी जिंदगी में वो गर्म कंकड़ एक अवसर /मोका है ,और ये सब कंकड़ दिन 
है हर एक कंकड़ एक नया दिन है ,वो गर्म कंकड़ कब आपके हाथ में आएगा आप अभी नहीं 
जानते ,आपको बहुत ध्यान से हर कंकड़ को परखना है यानि हर दिन कुछ ना कुछ सीखना है 
हर दुःख से हर प्रॉब्लम से हर इन्सान से सीखना है ,
अचानक गर्म कंकड़ कब आपके हाथ में आ जाये जो आपकी पूरी जिंदगी बदल दे 
जो आपकी पूरी जिंदगी को सोने की बना दे ,ये आपके हाथ  में कब आ जाये आप नहीं जानते 
आज नहीं तो कल जब वो कंकड़ आपके हाथ में आ जाये तो वो कंकड़ आपकी हर चीज को सोने 
में बदल देगा ,


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