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क्या आप सोने के लिए पैदा हुए हो ,कंकाल बनने का इंतज़ार मत करो..कैसे लड़े

क्या आप सोने के लिए पैदा हुए हो…………

जिस प्रकार रोज हमेशा दुसरो पर गुस्सा होते हो ना और उन्हें गालिया देते हो
कुत्ते कमीने ,माँ की, बहिन की, पता नहीं क्या क्या ,
आज ये सारा गुस्सा सारी गालिया अपने उपर निकालो ,और अपने आप से पूछो
क्या आप सोने के लिए पैदा हुए हो ,
यदि जबाब हां आता है तो पड़े रहो इसी दिन की तरहे , लेकिन किसी चीज की
उम्मीद मत करना ,किसी चीज को पाने के सपने मत देखना ,
क्यूंकि ऐसे पड़े रहने से ,कोई सपना कोई उम्मीद कुछ भी पुरे नहीं होने वाले
लेकिन जबाब नहीं आता है ,की आप सोने के लिए नहीं, किसी महाँन मकसद के
 लिए पैदा हुए हो ,तो अभी इसी वक्त उठ खड़े हुवो ,और अपने आप को पहचानो
अपनी ताकत को पहचानो अपने मकसद को पहचानो ,
क्यूंकि मृत्यु के बाद तो हमेशा के लिए सोना है ,
लेकिन जबतक हम इस पृथ्वी पर है ,अपने समय का पूरा प्रयोग करना है
इसे जिए इस महसूस करे ,
जो लोग इस पृथ्वी पर महाँन कहलाये है , वो 24 घंटो में 4 /5  घंटे  सोते है
कभी सोचा है  क्यों उनके पास तो इतनी संपति  है बहुत पैसे है ,
सबकुछ है उनके पास फिर भीं वो लोग क्यू नहीं सोते 10 /12 घंटे आपकी तरहे
क्यूंकि उनको पता है मरने के बाद हमेशा ही सोना ही है
तो क्यों ना इस समय का पूरा उपयोग करे ,
और अपने आप को आशमान की बुलंदियों पर लके जायँ
अब में इस बात को 2 मिंनट समजाउ या 2 घंटे कोई फर्क नहीं पड़ता 
समझने वाला तो 2 मिनिट में समझ जायगा और जिसको नहीं समझना 
वो घंटो भर भी समझाने से भी नहीं समझगा ,
 
इसीलिए अपनी आप की वल्यु कीजिये ,अपनी ताकत को समजिये 
की आपकी ताकत सोने में नहीं जागने में है ,

कंकाल बनने का इंतज़ार मत करो
  • कंकाल बनने का इंतज़ार मत करो


एक बार एक फ़क़ीर एक नदी के किनारे बैठा हुआ था ,और नदी की लहरों को
देख रहा था।, एक यक्ति  वंहा आया और पूछा उनसे बाबा जी आप यंहा क्या कर
रहे हो ,बाबा जी ने कहा में  इस नदी के जल के पूरी तरहे बेह जाने का इंतजार कर
रहा हु , जब ये जल बेह जौयगा तो में इस नदी को पार करूंगा ,
उस यक्ति ने हँसते हुए कहा बाबा जी ये नदी ऐसे तो आप कभी पर कर ही
नहीं पाओगे ,क्यूंकि ये जल तो ऐसे ही बहता रेहगा ,

उस फ़क़ीर ने उस यक्ति की और देखा और हँसते हुए कहा की यही बात
में तुम सबको समझाना चाहता हु ,की तुम सब कहते हो की जिस हमारी
सारी  जिम्मेदारियां खत्म हो जाएगी ,उस दिन हम मौज करेंगे ,मस्ती करेंगे
अपने पसंद का काम करेने , अपने परिवार को समय दंगे ,

  • याद रखना ये जिम्मेदारियां भी नदी के पानी के जैसे है , 
  • आपकी की ज़िंदगी खत्म हो जाएगी लेकिन ये नदी का पानी ऐसे ही बहता जाएगा ,
आपकी जिम्मेदारियां कभी खत्म नहीं होगी , अब आपको फैसला लेना है की
इन जिम्मेदारियों के चलते आप अपनी जिंदगी को कितने अच्छे से जी सकते हो
यही बात में आप सभी को भी समझना चाहता हु ,कई बार आप अपनी जिंदगी में
कई सारी चीजे करना चाहते है ,लेकिन जिम्मेदारीयो को दोसी ठहराते दते है
की अभी मुझे ये काम है इसलिए नहीं कर पा रहा हु , मुझे वो काम इसीलिए नहीं
कर पा रहा हु ,
याद रखियेगा ,ये जिंदगी एक बार चली गयी तो वापिस लौट के नहीं आएगी
ये जिम्मेदारियां तो लगी रेहगी ,आज नही तो कल , कल नहीं तो परसो ,
ये जिम्मेदारियां कभी ख़त्म नहीं होने वाली है , इसलिए अपनी जिंदगी को
बहुत अच्छे तरीके से ,खुशनुमा तरीके से जिए , जो काम करना चाहते हो उसे करिये
शायद आपको बात समझ में आ गयी होगी ,



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