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shree lord kirshna quote & thoughts (bhagvad geeta )

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shree loard kirshna quote & thoughts (bhagvad geeta )

क्या आपका संसार में होना या ना होना दोनों बराबर  है 

”मनुष्य की सोच ”


संसार का सबसे गहन या कहो सबसे कठिन भाग ,कब क्या होने के पश्चात ये मन क्या सोच बैठे ,ये कहना असंभव है

और यही सोच कही बार हमारे मन में हीं की भावना ले आती है ,हम सदा अपने की ऊपर की क्ष्रणियों के यक्तियों को

देखते है ,उनके जीवन का विश्लसन करते है और फिर स्यंम को हीन समझ लेते है,इसके पास इतना धन है ,

इसके पास कितना बल है , और मेरे पास ………..   कुछ भी नहीं है।

में कितना हीं यक्ति हु , सांसर में मेरे लिए कुछ भी नहीं ,होता ह्ना ऐसा आप सबके साथं  किन्तु ऐसा नहीं है

आपके पास भी बहुत कुछ है पलट के देखिये ,एक भूखे यक्ति को केवल एक रोटी मिल जाये , भलही वो किसी और के लिए

वो अन्न का दाना होगा किन्तु उसके लिए वो भोज से कम नहीं है ,इसलिए जब अपने मन में हीन भावना जागे तो

अपनों की और देखिये ,उनकी और पलटिये ,आपको विश्वाश हो जाएगा की भले ही आप इस संसार के लिए कुछ भी

नहीं हो ,कुछ लोगो के लिए आप संपूर्ण संसार है।

   ” जो आपका संसार है उसमे खुश रहना सीखिए ”


श्री कृष्ण वाणी 

”हम में से ऐसा  कोई नहीं होगा जिसने वृक्षों को नहीं देखा होगा ,वृक्षों पे इन पक्षियों को नहीं देखा होगा।

इन पक्षियों को अपने छोटे -छोटे बच्चो को भोजन कराते नहीं देखा होगा ,

संसार का सबसे  ममत्व वाला दृश्य होता है वो ,चिड़िया दूर से ही अपनी चोंच में दाना भरकर लाती है

सयंम भोजन न  करने वाली अक्षम संतान की चोंच में डालती है ,सयंम भूखी रहकर ,निस्वार्थ ,

और जब संतान के पंख निकल आते है तो वो उसे उड़ना सीखाती है ,और उसके पश्चात वो उसे स्वतंत्र कर देती

सयंम जीवन जीने के लिए ,इस आकाश में उड़ान भरने के लिए ,


और हम मनुष्य क्या करते है , जिस संतान को हम पंछी की भांति पालते है ,उसके पंख निकलते ही हम उसे बांध देते

है ये सोचकर की वो कंही दूर उड़कर ना चली जाये ,असा नहीं है की इस स्थिति में माता पिता को अपनी संतान से प्यार

नहीं है ,अवश्य है ,किन्तु इसपर प्रेम पर मोह भरी पड जाता है ,

जो सयंम अपनी संतान और भविष्य के बीच बादा बन जाता है ,

हम ये  भूल जाते है की हम केवल जन्मदाता है ,भाग्य विदाता नहीं , तो जब प्रेम में मोह आ जाये तो वो प्रेम नहीं

स्वार्थ बन जाता है ,इसलिए प्रेम को पास रखिये और मोह को दूर।

क्यूंकि जिसे से प्रेम करते है , उसका विकाश नहीं रोका करते ,

♥राधे राधे ♥

”जगत में यक्ति को किसी न किसी प्रकार की निर्बलता जरूर होती है ,जैसे कोई बहुत अधिक दौड़ नहीं सकता तो

कोई जयादा भार  नहीं उठा सकता ,कोई असाध्य रोग से पीड़ित रहता है तो कोई पढ़े हुए पाठों को स्मरण में नहीं रेख पाता

ऐसे अनेको उदहारण और है ,क्या आप किसी ऐसे यक्ति को जानते हो जिसे सबकुछ प्राप्त हो।

और हम जीवन की उस एक निर्बलता को जीवन का केंद्र मानकर जीते है ,इसकारण से ह्र्दय में असंतोष रहता है सदा

परन्तु  कुछ यक्ति ऐसे भी होते है जो अपने पुरषार्थ और श्रम से उसे निर्बलता को पराजित कर देते है

      ”क्या भेद है उनमे और अन्य लोगो में ”


”क्या आपने कभी  विचार किया है , की क्या भेद है उनमे  पर आप में ,

सरल सा उत्तर है इसका , जो यक्ति निर्बलता से पराजित नहीं होता ,जो पुरषार्थ करने का साहस रखता है ह्रद्य

में वो निर्बलता को पार कर जाता है। अर्थार्त निर्बलता अवश्य भगवान देता है परन्तु मर्यादा तो मनुष्य का मन

ही निर्मित करता है


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